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  • उजाले की ओर

    Ujale Ki Oor

    Author:

    Publisher: Geeta Pustak Kendr

    Pages: 212
    Language: Hindi
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Description

श्रीराज जी तेलुगु के प्रगतिशील कहानीकार, नाटककार, चलचित्र-लेखन, संवाददाता ओर उच्चकोटि के विचारक हैं। इनकी कहानियाँ विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। श्रीराज जी ने अपनी कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन के यथार्थ के विभिन्न पहलुओं को अभिव्यक्ति दी है। परिवर्तित समाज की संगतियों-विसंगतियों का यथार्थ चित्रण करते हुए तेलुगु कहानी के माध्यम से श्रीराज जी ने स्थायी महत्व का लेखन-कार्य किया है। श्रीराज की कहानियों में सर्वत्र जीवन को सहजता से जीने की सकारात्मक चेतना दृष्टिगोचर होती है।

इन कहानियों में श्रीराज जी अपने समय और समाज की अनेक परतों को संवेदनात्मकता के साथ पाठकों के सामने उघाडते हैं। वे जीवन की जटिलता, तनाव, कुंठातथा तेजी से बदलते परिदृश्य में संक्रांत मनःस्थिति की पीड़ा को झेलने और संवेदनशीलता के साथ उसमें सहज ढंग से जीने की बात कहते हैं। श्रीराज जी एक मध्यवर्ग के व्यक्ति होने के नाते उस वर्ग में व्यक्ति, समाज और समूह के स्तर पर आनेवाले परिवर्तनों पर, उस वर्ग की मानसिकता के अलगअलग पक्षों पर लिखने का ईमानदार एवं सार्थक प्रयास किया है। कलात्मक निस्संगता इनके कहानीशिल्प की एक विशेषता है। इनका कहानी-शिल्प इनकी वैचारिक दृष्टि का अनुसरण करता है और उसकी अभिव्यंजना भी। इनकी कहानियाँ समकालीन तेलुगु कहानी साहित्य में संवेदना और शिल्प की दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट स्थान रखती हैं।

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