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  • समुन्दर मेरा नाम

    Samundar Mera Naam

    Pages: 35
    Language: Hindi
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Description

अनेक प्रवृत्तियों और रचना-पद्धतियों में कविता लिखनेवाले शेषेन्द्र की अभ्युदयवादी कृतियाँ हैं। ऋतुघोष, दहकता सूरज और मेरी धरती मेरे लोग। इनमें संकलित कविताओं में मार्क्सवाद की अपेक्षा सामाजिक चेतना पर ज्यादा बल पडा है। कविता के संबंध में ये पंक्तियाँ उनकी कवितात्मक प्रवृत्ति को स्पष्ट करती हैं। एक सुंदर ‘पोयम' कहते है तो उसका एक हृदय होना चाहिए। उसे आँसु बहाना है। क्रोधाग्नियों को उगलना है। पीडितों का पक्षधर होकर मानव का ऋण चुकाना है।

- डॉ. एस. टी. नरसिंहाचारी

*****

तेलुगु के शीर्षस्त कवि के गंभीर वचनों के बाद अनुवादक अपनी ओर से क्या कह सकता है! आप से मेरे आत्मीय संबध हैं। हमारे बीच साहित्यिक वार्तालाप हमेशा होते थे। ऐसे ही एक वार्तालाप के समय शेषेंद्र जी ने मुझसे अपनी एक कविता संकलन “समुद्रम ना पेरु” के अनुवाद की बात की (21-07-2002)। मैंने सहर्ष स्वीकार किया। कार्य संपन्न भी हुआ। अनेक कारणवश प्रकाशित नहीं हो पाया। अब इस कृति के प्रकाशन कार्य का दायित्व शेषेंद्र जी के पुत्र श्री सात्यकि ने लिया है। वे शेषेंद्र की कृतियों के पुनः प्रकाशन के लिए सक्षम और सफल प्रयास कर रहे हैं। उन्हें मैं हार्दिक बधाइयाँ और आशिर्वाद देता हूँ।

शेषेंद्र केवल तेलुगु साहित्य के ही नहीं बल्कि समूचे भारतीय साहित्य के और समसामयिक विश्व साहित्य के वरेण्य और प्रभावशाली विद्वान कवि हैं। कृति को अनुवाद करने का जो सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है, उससे अनिर्वचनीय आनंद का मैंने अनुभव किया है। तदर्थ मैं स्वर्गीय शेषेन्द्र जी का शब्दों द्वारा आभार व्यक्त करने में अपने आपको अवश्य असमर्थ अनुभव कर रहा हूँ। मेरा अटल विश्वास है कि आम कविता प्रेमी और साहित्यकार इस कृति को बाहें पसार कर स्वागत करेंगे।

इस अनूदित काव्य को उनकी अमर स्मृति में उनकी ग्यारहवीं पुण्य तिथि के पावन अवसर पर उन्हें समर्पित कर रहा हूँ।

- यद्दनपूडि वेंकटरमण राव

*****

శేషేంద్ర పదకొండవ వర్ధంతి సందర్భంగా శేషేంద్ర అనువాద కావ్యం... ‘సముందర్ మేరా నామ్’...కవి కుమారుడు సాత్యకి హింది సాహిత్య జగత్తుకు బహుకరిస్తున్నారు.

మహాకవి శేషేంద్ర తొలి హింది ఈ-బుక్ ఇదే కావడం మరొక విషేశం.

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दार्शरिनिक और िविद्वार्नि किवि एविं कार्व्य शार्स्त्रज
शेषेद्र शमार्र
20 अकूबर 1927 – 30 मई 2007
मार्तार् िपितार् : अम्मार्यम्मार्, जी. सुब्रह्मण्यम
भार्ई बहनि : अनिसूयार्, देविसेनिार्, रार्जशेखरम
धर्मरपिि त्नि : श्रीमती जार्निकी शमार्र
संतार्नि : विसुंधर्रार्, रेविती (पिुित्रियार्ँ)
विनिमार्ली सार्त्यिक (पिुत्रि)
बी.ए : आन्ध्रार् िक्रिस्टि स्टियनि कार्लेज गुंटिूर आं.प.
एल.एल.बी : मद्रार्स िविश्वििविद्यार्लय, मद्रार्स
निौकरी : िडिप्यूटिी मुिनििसपिल कमीशनिर (37 विषर)
मुिनििसपिल अि ड्मिनिस्टिरेशनि िविभार्ग, आं.प.
***
शेषेद्र निार्म से ख्यार्त शेषेद्र शमार्र आधर्ुिनिक भार्रतीय किवितार् क्षेत्रि मे एक अनिूठे िशखर
है। आपिकार् सार्िहत्य किवितार् और कार्व्यशार्स्त्र कार् सविरश्रेष्ठ संगम है। िवििविधर्तार् और
गहरार्ई मे आपिकार् दृष्टिष्टिकोण और आपिकार् सार्िहत्य भार्रतीय सार्िहत्य जगत मे आज
तक अपििरिचित है। किवितार् से कार्व्यशार्स्त्र तक, मंत्रिशार्स्त्र से मार्क्सरविार्द तक आपिकी
रचिनिार्एँ एक अनिोखी पितभार् के सार्क्षी है। संस्कृत, तेलुगु औऱ अंग्रेजी भार्षार्ओं मे
आपिकी गहनि िविद्वत्तार् निे आपिको बीसविीं सदी के तुलनिार्त्मक सार्िहत्य मे िशखर समार्नि
सार्िहत्यकार्र के रूपि मे पितिष्ठत िकयार् है। टिी.एस. इलिलयटि, आचिरबार्ल्डि मेक्लीश और
शेषेन्द्र िविश्वि सार्िहत्य और कार्व्यशार्स्त्र के ित्रिमूितर है। अपिनिी चिुनिी हुई सार्िहत्य िविधर्ार् के
पित आपिकी िनिष्ठार् और लेखनि मे िविषय की गहरार्इलयों तक पिहुंचिनिे की लगनि निे शेषेद्र
को िविश्वि किविगण और बुिद्धि जीिवियों के पििरविार्र कार् सदस्य बनिार्यार् है।