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  • जिज्ञासा

    Jigyasa

    Pages: 44
    Language: Hindi
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Description

'जिज्ञासा' काव्य के कवि हैं आचार्य राविकंटि वसुनंदन। 'षष्टिपूर्ति' के अवसर पर कवि ने इस लघु काव्य की रचना की। जो उनके साठ वर्ष का अनुभव-सार है। इसकी रचना कवि ने त्रिपदों में की है।

जिज्ञासा का अर्थ है जानने की अभिलाषा। कवि ने प्रस्तुत रचना में प्रश्नों द्वारा जनता की जिज्ञासा को तृप्त करने की सफल चेष्टा की है। कवि स्वयं से प्रश्न करते हैं।

साठ वर्ष पूरे करने के संदर्भ में कवि ने साठ प्रश्न किये हैं। उन्होंने त्रिपद में इसे नि़खारा है। इनमें पहला वाक्य प्रश्न है। दूसरा उपमान है और तीसरा उत्तर ।

'जिज्ञासा' के कवि ने एक निराले ढंग से अनुभूति को अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है,जो आद्यंत सोचने पर मजबूत करता है। आशा है हिंदी-जगत इस प्रयास का सम्मान करेगा।

- डॅा. एम. रंगय्या

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